लण्ड की ठरक और उसकी चुदास

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किसी ने सच ही कहा है कि जो आदमी ठरकी होता है.. उसे हर जगह चूत ही नज़र आती है।
मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल था.. मुझे भी औरत को देखते ही.. उसकी गांड का आकार नज़र आता था और मेरी नज़र उसके चेहरे पर तो जाती ही नहीं थी। सबसे पहले उसके मम्मों पर और उसके बाद उसकी गांड पर.. और फिर मैं मन ही मन में उसकी गांड के छेद और चूत के छेद को महसूस करके अपने लंड की गर्माहट को महसूस करने लगता था।

मेरे और मेरे ठरकपन के बीच में.. सिर्फ मेरा पेशा था; क्योंकि मैं एक सरकारी शिक्षक था और मुझे ज्यादा पैसे नहीं मिलते थे.. तबादला भी गांव के स्कूलों में होता रहता था।

एक बार मेरा तबादला एक गांव में हुआ और मेरे रहने का इंतज़ाम भी स्कूल के पीछे बने कमरों में था। मेरे अलावा स्कूल में स्कूल का चौकीदार अपने परिवार के साथ रहता था.. परिवार क्या.. वो और उसकी बीवी ही रहते थे। उनको कोई बच्चा नहीं था।
मेरा घर अच्छा बना हुआ था और चौकीदार का घर मेरे घर के पीछे था।
चौकीदार की बीवी ही.. मेरे घर की साफ़-सफाई करती थी, मेरे कपड़े धोती थी और मेरे लिए खाना बनाती थी। मेरी निगाहें उसकी मटकती गांड पर और हिलते मम्मों पर ही लगी रहती थी।

स्कूल कुछ दिनों के लिए बंद हो गया था और मैंने स्कूल में ही रुकने का सोच लिया था।

मैं कभी अपने कमरे की छत पर नहीं गया था.. तो एक दिन मैंने अपने चौकीदार को बुलाया और उससे छत की सफाई करवाने लगा।

चौकीदार छत की सफाई करके चला गया और मैं कुछ देर के लिए वहीं रुक गया। जब मैं छत पर पीछे गया.. तो मैंने देखा कि पीछे चौकीदार का बाथरूम था और उसकी छत नहीं थी और उस समय उसकी बीवी नहा रही थी, वो बिल्कुल नंगी हो कर नहा रही थी। उसका जिस्म हल्का काला था और उसके बड़े चूचे और उन पर भूरे निप्पल देखकर मेरा लंड ‘सन्न’ से तन गया। वो गरम औरत जितनी देर वहाँ नहाती रही.. मैं छुप-छुप कर उसको देखता रहा और मैंने छत का दरवाजा बंद करके अपने लंड को बाहर निकाल लिया और हुए मुठ मारने लगा।

मैंने जान-बूझकर अपने लंड को इस तरह से मुठियाया कि मेरे लंड से मुठ निकल कर उस गरम औरत के ऊपर गिरे। जैसे ही मेरा माल उस पर टपका उसने ऊपर देखा फिर मेरे मुठ को देखकर वो गरम औरत मुस्कुरा दी।

अब तो मैं रोज़ उस गरम औरत को नहाते हुए देखता और मुठ मार के उस पर गिरा देता। चौकीदार की बीवी भी मेरे सामने मस्त कामुक कपड़े पहनकर घर का काम करने आती और अपने ब्लाउज़ के एक-दो बटन खोल कर रखती।
मैं दूसरे कमरे में बैठे हुए उसकी गांड को देखते हुए मुठ मारता रहता।

अब मैंने चौकीदार को थोड़ा ज्यादा व्यस्त कर दिया और अक्सर उसको घर से बाहर ही रखता और उसकी बीवी को पटाने की जुगत लगाता रहता।

उसकी बीवी भी अब मुझे अपने बदन को दिखा करके मुझे ललचाती; कभी साड़ी उठाकर अपनी चिकनी टाँगें दिखाती, कभी ब्लाउज में से अपने चूचे खुजाती और उसमें से झाकने की कोशिश करते हुए उसके भूरे निप्पल मुझे दिख जाते।

अब मेरी वासना का सब्र टूटने लगा था और एक दिन जब वो सफाई कर रही थी.. तो मैंने चौकीदार को किसी काम से दूर भेज दिया और खुद पलंग पर आकर लेट गया, उस औरत को अपनी टाँगें दबवाने के लिए बुलाया।

जैसे ही वो कमरे में आई.. मैंने दरवाजे जाकर दरवाजे को बंद कर दिया और उसको पीछे से पकड़ लिया। उसके उस समय भी ब्लाउज़ के बटन खुले थे और उसके चूचे बाहर आने को बेताब थे।

मेरे पकड़ते ही गरम औरत बोली- बाबू जी क्या करते हो? कोई आ जाएगा..

मैंने कहा- कोई नहीं आएगा और उसको अपनी गोद में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया, फिर एक ही बार में उसकी साड़ी खींच दी और उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। मैंने जल्दी से अपने कपड़े भी उतारकर खुद को नंगा किया और उसके नंगे बदन से जाकर लिपट गया।

वो गरम औरत बोली- बड़े बैचैन हो बाबू जी..
उसने खुद को मुझसे लिपटा कर मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़कर मेरी मुठ मारने लगी।

‘तुम्हारा लंड तो मुझे तभी पसंद आ गया था.. जब तुमने पहली बार छत से अपना माल मेरे ऊपर गिराया था और उसी दिन से तुम्हें देख रही थी कि कब तुम मेरी अपने लंड से भेंट करवाते हो?’

उसके बाद वो नीचे को खिसक गई और 69 की मुद्रा में आ गई। उसने अपनी टांगों को इस तरह मेरी गर्दन में फंसाया कि उसकी चूत सीधे मेरे मुँह से चिपक जाए।
अब उसने मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया और मस्ती से वो मेरे लंड को चूसने लगी।

मेरी गांड मस्ती में हिलने लगी.. उसने अपनी टाँगें हिलाकर मुझे भी अपनी चूत चाटने को बोला और मैंने अपनी जीभ निकालकर उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। उसकी चूत बहुत ही नमकीन थी और मेरी जीभ की गरमी पाकर उसने अपनी एक टांग को ऊपर उठा लिया और अब मेरी जीभ उसकी चूत के अन्दर चाट रही थी।

मेरा लंड टाईट हो चुका था.. मैंने उसको घुमा कर सीधा किया और उसकी टांगों को खोल दिया। फिर अपने लंड को उसकी चूत पर लगा दिया और अपने हाथ से निशाना लगाकर लंड को चूत पर रगड़ने लगा। लण्ड लगते ही वो बिस्तर पर मचलने लगी थी और मस्ती में इठला रही थी।

मैंने उसकी तरफ मुस्कुराते हुए.. एक बार में ही अपने लंड को उसकी चूत में उतार दिया और उसके मुँह से सिसकी भरी चीख निकल पड़ी।
मैंने उसकी टांगों को पकड़ा और अपनी गांड का जोर लगाकर धक्का मारना जारी रखा। मेरे हर धक्के के साथ.. उसकी गांड भी हिल रही थी और वो मस्ती में कामुक आवाजें निकाल रही थी।

चुदाई के धक्के तेज होने लगे और उसने बिस्तर को कस कर पकड़ लिया और मैंने उसकी टांगों को.. फिर हम दोनों एक साथ बिस्तर पर गिर गए, मैंने अपना पूरा माल उसकी चूत में छोड़ दिया।
वो मेरे से लिपट गई और बोली- बाबूजी शादी के बाद.. पहली बार इस चूत की प्यास बुझी है.. वरना मेरा मर्द तो बेकार है.. इसलिए मुझे कोई बच्चा भी नहीं है। लेकिन, अब आप हो तो मुझे कोई परेशानी नहीं रहेगी।

इस तरह मैंने उसको चोद कर एक बच्चा दिया और जितने साल वहाँ रहा.. जब भी मौका मिला उसको मस्ती में खूब चोदा। फिर मेरा वहाँ से तबादला हो गया और मैं नई जगह नई गरम औरत की तलाश में चला गया।

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